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पाकिस्तान क्रिकेट में मचा घमासान: अजहर अली ने आकिब जावेद को घेरा, बाबर आजम के समर्थन में उतरकर उठाए गंभीर सवाल

पाकिस्तान क्रिकेट में मचा घमासान: अजहर अली ने आकिब जावेद को घेरा, बाबर आजम के समर्थन में उतरकर उठाए गंभीर सवाल

पाकिस्तान क्रिकेट टीम का हालिया प्रदर्शन वैश्विक मंच पर लगातार निराशाजनक रहा है। इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट श्रृंखला में मिली करारी शिकस्त के बाद से ही पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) और उसके आंतरिक ढांचे में भारी उथल-पुथल मची हुई है। इस हार के बाद पाकिस्तानी क्रिकेट के गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। पूर्व खिलाड़ियों और विशेषज्ञों ने टीम के चयन, कप्तानी और प्रशासनिक फैसलों पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। इसी कड़ी में पाकिस्तान के पूर्व टेस्ट कप्तान अजहर अली ने नवनियुक्त चयनकर्ता आकिब जावेद और पूरी चयन समिति को अपने निशाने पर लिया है।

अजहर अली ने टीम के स्टार बल्लेबाज और पूर्व कप्तान बाबर आजम को टीम से बाहर किए जाने के फैसले पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका मानना है कि टीम के खराब प्रदर्शन का ठीकरा केवल एक खिलाड़ी पर फोड़ना पूरी तरह से अनुचित है। इस विवाद ने पाकिस्तान क्रिकेट के भीतर चल रही गुटबाजी और अस्थिरता को एक बार फिर दुनिया के सामने उजागर कर दिया है।

घटना का विस्तृत विवरण: क्या हुआ और कैसे बिगड़े हालात?

इंग्लैंड के खिलाफ मुल्तान में खेले गए पहले टेस्ट मैच में पाकिस्तान को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था। इस मैच में पाकिस्तान ने पहली पारी में 556 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था, इसके बावजूद टीम को पारी और 47 रनों से शिकस्त झेलनी पड़ी। इस ऐतिहासिक हार के तुरंत बाद पीसीबी ने एक नई ‘पुनर्गठित’ चयन समिति की घोषणा की, जिसमें आकिब जावेद, अलीम डार और अजहर अली खुद भी शामिल थे (हालांकि बाद में मतभेदों के कारण स्थितियां बदलीं)।

इस नई चयन समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए दूसरे और तीसरे टेस्ट मैच के लिए टीम के सबसे बड़े खिलाड़ी बाबर आजम, स्टार तेज गेंदबाज शाहीन शाह अफरीदी और नसीम शाह को टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया। चयन समिति ने इसे ‘विश्राम’ (Rest) देने का नाम दिया, लेकिन क्रिकेट जगत और प्रशंसकों ने इसे सीधे तौर पर टीम से बाहर (Drop) किए जाने के रूप में देखा। इसी फैसले ने पाकिस्तान क्रिकेट में एक नए विवाद को जन्म दे दिया, जिसके बाद अजहर अली खुलकर बाबर आजम के समर्थन में आ गए और उन्होंने आकिब जावेद की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए।

जमीनी हकीकत, प्रभावित क्षेत्र और तकनीकी/राजनीतिक पहलू

तकनीकी दृष्टिकोण से देखा जाए तो बाबर आजम पिछले कुछ समय से टेस्ट क्रिकेट में खराब फॉर्म से जूझ रहे थे। उन्होंने अपनी पिछली 18 टेस्ट पारियों में एक भी अर्धशतक नहीं लगाया था। लेकिन अजहर अली का तर्क है कि बाबर आजम जैसे विश्व स्तरीय खिलाड़ी को इस तरह से बाहर करने से टीम के मनोबल पर बेहद नकारात्मक असर पड़ता है। अजहर अली ने एक खेल चैनल पर बातचीत के दौरान कहा:

“बाबर आजम पाकिस्तान के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक हैं। यदि वह खराब फॉर्म से गुजर रहे थे, तो चयन समिति और प्रबंधन का काम उन्हें मानसिक रूप से मजबूत करना और उनका समर्थन करना था, न कि उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखाना। आकिब जावेद और चयन समिति के इस फैसले से टीम में असुरक्षा की भावना पैदा हुई है।”

इसके साथ ही, पाकिस्तान की पिचों के मिजाज को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। पहले टेस्ट में पूरी तरह से सपाट पिच बनाने के बाद, दूसरे और तीसरे टेस्ट के लिए मुल्तान और रावलपिंडी में अत्यधिक स्पिन-अनुकूल (Dusty Pitches) पिचें तैयार की गईं। हालांकि पाकिस्तान ने इन पिचों की मदद से श्रृंखला में वापसी की, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह दीर्घकालिक समाधान नहीं है। यह केवल अपनी कमियों को छिपाने का एक तात्कालिक प्रयास है।

पीसीबी का रुख, आधिकारिक बयान और चयन समिति की कार्रवाई

इस पूरे विवाद पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी और मुख्य चयनकर्ता आकिब जावेद ने अपना बचाव किया है। आकिब जावेद का कहना है कि बाबर आजम और अन्य वरिष्ठ गेंदबाजों को बाहर करने का निर्णय पूरी तरह से रणनीतिक था और इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को मानसिक और शारीरिक रूप से तरोताजा होने का अवसर देना था।

पीसीबी के एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बयान जारी करते हुए कहा कि, “चयन समिति का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान क्रिकेट के भविष्य को सुरक्षित करना और घरेलू परिस्थितियों का अधिकतम लाभ उठाना है। खिलाड़ियों को आराम देना उनके कार्यभार (Workload Management) को प्रबंधित करने का एक हिस्सा है, इसे किसी भी खिलाड़ी के करियर के अंत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।” हालांकि, अजहर अली और अन्य पूर्व दिग्गजों ने इस स्पष्टीकरण को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और इसे प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने का एक बहाना बताया है।

पाकिस्तानी क्रिकेट प्रशंसकों और खेल अर्थव्यवस्था पर गहरा असर

इस प्रशासनिक और खेल संबंधी उथल-पुथल का सीधा असर पाकिस्तान क्रिकेट की ब्रांड वैल्यू और खेल अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। बाबर आजम की अनुपस्थिति के कारण स्टेडियमों में दर्शकों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई। प्रायोजक (Sponsors) भी टीम के इस अस्थिर रवैये से चिंतित हैं। पाकिस्तान में क्रिकेट केवल एक खेल नहीं बल्कि एक जज्बात है, और टीम के इस तरह के प्रदर्शन और आंतरिक कलह से करोड़ों प्रशंसकों का दिल टूटा है। सोशल मीडिया पर पीसीबी और आकिब जावेद के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे बोर्ड पर दबाव और बढ़ गया है।

मुख्य बिंदु और प्रमुख आंकड़े

  • बाबर आजम का हालिया टेस्ट फॉर्म: बाबर आजम ने दिसंबर 2022 के बाद से टेस्ट क्रिकेट में कोई भी बड़ी पारी नहीं खेली है, जिससे उनका औसत लगातार गिरा है।
  • ऐतिहासिक हार: मुल्तान टेस्ट में पहली पारी में 550+ रन बनाने के बाद भी पारी से हारने वाली पाकिस्तान दुनिया की पहली टीम बनी।
  • चयन समिति में बदलाव: पीसीबी ने पिछले एक साल में चार बार चयन समिति के सदस्यों और संरचना में बदलाव किया है, जो प्रशासनिक अस्थिरता को दर्शाता है।
  • घरेलू रिकॉर्ड: पाकिस्तान पिछले 3 वर्षों से अपने घरेलू मैदान पर लगातार टेस्ट श्रृंखला जीतने के लिए संघर्ष कर रहा है।

विशेषज्ञों की राय और भविष्य की चुनौतियां

क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान क्रिकेट इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। पूर्व तेज गेंदबाज वसीम अकरम और रमीज राजा ने भी पीसीबी की नीतियों की आलोचना की है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक पीसीबी में राजनीतिक हस्तक्षेप बंद नहीं होगा और चयन प्रक्रिया में निरंतरता नहीं आएगी, तब तक टीम का प्रदर्शन नहीं सुधर सकता।

आने वाले समय में पाकिस्तान को ऑस्ट्रेलिया और जिम्बाब्वे के कड़े दौरों पर जाना है। यदि चयन समिति और खिलाड़ियों के बीच का यह गतिरोध जल्द ही नहीं सुलझाया गया, तो आगामी विदेशी दौरों पर पाकिस्तान टीम को और भी गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। अजहर अली द्वारा उठाए गए सवाल केवल बाबर आजम के समर्थन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पाकिस्तान क्रिकेट की उस पूरी व्यवस्था पर प्रहार करते हैं जो बिना किसी ठोस योजना के काम कर रही है। अब देखना यह होगा कि पीसीबी इन आलोचनाओं से सीख लेकर कोई सुधारात्मक कदम उठाता है या फिर यह विवाद पाकिस्तान क्रिकेट को और गहरे संकट में धकेलता है।

Accredited news correspondent and investigative contributor at AvaNews.in.

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