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ट्रैफिक जाम से बचने के लिए फुटपाथ पर चढ़ाई महिंद्रा थार, मां से बोला- ‘यही फायदा है’; सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा, सख्त कार्रवाई की मांग

ट्रैफिक जाम से बचने के लिए फुटपाथ पर चढ़ाई महिंद्रा थार, मां से बोला- ‘यही फायदा है’; सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा, सख्त कार्रवाई की मांग

देश की सड़कों पर बेलगाम और गैर-जिम्मेदाराना ड्राइविंग का एक बेहद हैरान और विचलित करने वाला मामला सामने आया है। भारी ट्रैफिक जाम से बचने के लिए एक युवक ने अपनी भारी-भरकम महिंद्रा थार गाड़ी को सीधे राहगीरों के चलने के लिए बने फुटपाथ पर चढ़ा दिया। इतना ही नहीं, गाड़ी में बैठी अपनी मां से उसने बेहद अहंकार भरे लहजे में कहा कि ‘थार लेने का यही तो सबसे बड़ा फायदा है।’ गाड़ी के भीतर से ही रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही इंटरनेट पर नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा है।

यह घटना न केवल ट्रैफिक नियमों की खुली धज्जियां उड़ाने का प्रत्यक्ष प्रमाण है, बल्कि यह हमारे समाज में तेजी से घटते नागरिक बोध (Civic Sense) और सड़कों पर पैदल चलने वालों के बुनियादी अधिकारों के खुले हनन को भी रेखांकित करती है। पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित स्थान माने जाने वाले फुटपाथ को अपनी निजी जागीर समझकर उस पर एसयूवी (SUV) दौड़ाना गंभीर दुर्घटना को निमंत्रण देने जैसा है।

घटना का विस्तृत विवरण: वायरल वीडियो और अहंकार की पराकाष्ठा

वायरल हो रहे इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मुख्य सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लगी हुई है और जाम की स्थिति बनी हुई है। धैर्यपूर्वक कतार में खड़े रहने के बजाय थार चालक ने गाड़ी को झटके से मोड़कर फुटपाथ पर चढ़ा दिया। फुटपाथ की ऊंचाई और डिवाइडर को अपनी गाड़ी के 4×4 क्षमता के जरिए पार करते हुए वह अन्य अनुशासित चालकों को पीछे छोड़ते हुए आगे निकल गया।

वीडियो में ड्राइवर को अपनी मां से गर्व के साथ यह कहते सुना जा सकता है कि ऑफ-रोडिंग गाड़ी खरीदने का असली उद्देश्य यही है कि किसी भी जाम में फंसे बिना कहीं से भी रास्ता निकाला जा सके। इस पर सोशल मीडिया यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह ‘स्मार्टनेस’ नहीं बल्कि सड़क गुंडागर्दी और आपराधिक लापरवाही है।

“फुटपाथ पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए बनाए जाते हैं, न कि रईसजादों को अपनी एसयूवी की ताकत दिखाने और नियमों को रौंदने के लिए। ऐसे चालकों के खिलाफ केवल चालान नहीं, बल्कि गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा और लाइसेंस रद्दीकरण होना चाहिए।” – सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता

नागरिक बोध (Civic Sense) और सड़क सुरक्षा पर बड़ा सवाल

भारत में सड़क सुरक्षा हमेशा से एक चिंताजनक विषय रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में हर साल हजारों पैदल यात्री केवल इसलिए जान गंवा देते हैं क्योंकि उनके चलने के लिए निर्धारित स्थानों पर या तो अतिक्रमण होता है या फिर बेलगाम गाड़ियां उन्हें रौंद देती हैं। फुटपाथ पर गाड़ी चढ़ाने की यह प्रवृत्ति न सिर्फ पैदल यात्रियों के जीवन को खतरे में डालती है, बल्कि सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को भी भारी नुकसान पहुंचाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में विशेषकर युवा वर्ग में ऑफ-रोड गाड़ियों को ‘स्टेटस सिंबल’ और कानून से ऊपर दिखने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करने का खतरनाक चलन बढ़ा है। सोशल मीडिया पर रील्स और वीडियो बनाकर तथाकथित ‘दबंगई’ प्रदर्शित करने की यह होड़ सड़क हादसों का एक प्रमुख कारण बन रही है।

कानूनी प्रावधान: मोटर वाहन अधिनियम के तहत क्या हो सकती है कार्रवाई?

भारतीय मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के तहत फुटपाथ पर वाहन चलाना एक दंडनीय और गंभीर अपराध है:

  • खतरनाक ड्राइविंग (धारा 184): बिना किसी की सुरक्षा की परवाह किए खतरनाक तरीके से वाहन चलाने पर भारी जुर्माना और कारावास का प्रावधान है।
  • सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालना (IPC/BNS की धाराएं): राहगीरों के जीवन को संकट में डालने के मामले में पुलिस सुसंगत धाराओं में गैर-जमानती मामला दर्ज कर सकती है।
  • ड्राइविंग लाइसेंस का निलंबन (धारा 19): बार-बार या जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करने पर परिवहन विभाग संबंधित व्यक्ति का ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त या निलंबित कर सकता है।
  • वाहन जब्ती: यातायात नियमों के गंभीर उल्लंघन पर पुलिस वाहन को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 207 के तहत जब्त कर सकती है।

मुख्य बिंदु और सड़क सुरक्षा से जुड़े प्रमुख आंकड़े

  • वायरल घटना: जाम से बचने के लिए युवक ने फुटपाथ पर दौड़ाई महिंद्रा थार, मां के सामने दिया गैर-जिम्मेदाराना बयान।
  • पैदल यात्रियों की स्थिति: भारत में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वाले कुल लोगों में से लगभग 15 से 18 प्रतिशत संख्या पैदल यात्रियों की होती है।
  • सख्त जनआक्रोश: इंटरनेट पर लाखों लोगों ने वीडियो पर कमेंट करते हुए संबंधित राज्य की पुलिस से तत्काल ई-चालान और एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
  • बुनियादी ढांचे का हनन: फुटपाथ और पेडेस्ट्रियन पाथवे केवल 70 से 80 किग्रा के वजन के लोगों के लिए डिजाइन होते हैं, 2 टन की एसयूवी चलाने से सार्वजनिक संपत्ति टूटती है।

बढ़ता SUV कल्चर और भारतीय सड़कों पर ‘दबंगई’ की मानसिकता

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और समाजशास्त्रियों का कहना है कि गाड़ियों के आकार और ताकत के साथ चालकों की जिम्मेदारी भी बढ़नी चाहिए, लेकिन भारत में अक्सर इसका उल्टा देखने को मिलता है। बड़ी गाड़ियों को कानून तोड़ने के ‘पास’ की तरह देखा जाने लगा है। जब तक प्रशासन ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक केवल जुर्माने से इस बिगड़ैल मानसिकता पर अंकुश लगाना नामुमकिन होगा।

डिजिटल निगरानी और सीसीटीवी नेटवर्क के इस दौर में अब पुलिस के लिए ऐसे बेलगाम चालकों की पहचान करना और उनके घर चालान या नोटिस भेजना बेहद आसान हो गया है। जनता अब इंतजार कर रही है कि संबंधित ट्रैफिक पुलिस इस मामले में आरोपी चालक पर क्या दंडात्मक कार्रवाई करती है ताकि भविष्य में कोई अन्य चालक फुटपाथ को सड़क समझने की भूल न करे।

Accredited news correspondent and investigative contributor at AvaNews.in.

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