Diwali 2026 Shubh Muhurt: दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त थोड़ी देर में होगा शुरू, जानें पूजन का सटीक समय और विधि
📌 प्रमुख बातें व मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- आज 8 नवंबर 2026 (रविवार) को कार्तिक माह की अमावस्या तिथि पर देशभर में दीपावली मनाई जा रही है।
- लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल और स्थिर लग्न (वृषभ काल) को सबसे उत्तम माना गया है, जो थोड़ी ही देर में प्रारंभ हो रहा है।
- व्यापारिक प्रतिष्ठानों और घरों में पूजन के लिए सीमित समय का विशेष चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध रहेगा।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हरित पटाखों (Green Crackers) और सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य किया गया है।
आज 08 नवंबर 2026, रविवार को संपूर्ण भारतवर्ष सहित विश्व भर में फैले सनातन धर्मावलंबी हर्षोल्लास, प्रकाश और आस्था के महापर्व दीपावली का उत्सव मना रहे हैं। कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर मनाया जाने वाला यह पर्व धन, वैभव, सुख और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी और बुद्धि के दाता भगवान श्री गणेश के स्वागत का पावन अवसर है। शास्त्रों के अनुसार, दीपावली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों के गृह में प्रवेश कर उन्हें धन-धान्य का आशीर्वाद देती हैं।
ज्योतिषाचार्यों और पंचांग गणना के अनुसार, आज लक्ष्मी पूजन का सबसे पवित्र और फलदायी समय थोड़ी ही देर में शुरू होने जा रहा है। इस वर्ष पूजा के लिए शुभ समय का विशेष संयोग बन रहा है, लेकिन स्थिर लग्न (वृषभ काल) और प्रदोष काल की समयावधि बेहद सीमित है। ऐसे में श्रद्धालुओं को समय का विशेष ध्यान रखते हुए निर्धारित मुहूर्त के भीतर ही विधि-विधान से पूजन संपन्न करना होगा।
शुभ मुहूर्त और तिथियों का गणित: जानें लक्ष्मी पूजा का सटीक समय
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल और स्थिर लग्न (वृषभ लग्न) का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि स्थिर लग्न में पूजन करने से माता लक्ष्मी का वास घर में स्थायी रूप से रहता है।
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 08 नवंबर 2026 को दोपहर से ही अमावस्या तिथि प्रभावी हो चुकी है।
- प्रदोष काल (सर्वोत्तम समय): शाम 05:35 बजे से रात 07:31 बजे तक रहेगा।
- वृषभ लग्न (स्थिर लग्न): शाम 06:12 बजे से रात 08:08 बजे तक विद्यमान रहेगा।
- लक्ष्मी पूजा का मुख्य शुभ मुहूर्त: शाम 06:12 बजे से रात 07:31 बजे तक (कुल 1 घंटा 19 मिनट का स्वर्णिम समय)।
- महानिशीथ काल (तांत्रिक व विशेष अनुष्ठान): रात्रि 11:39 बजे से मध्यरात्रि 12:31 बजे तक।
व्यापारियों और दुकानदारों के लिए खाता-बही पूजन हेतु शुभ चौघड़िया मुहूर्त दोपहर में भी उपलब्ध रहा, वहीं संध्या कालीन मुहूर्त में गद्दी पूजन और मुख्य तिजोरी पूजन के लिए वृषभ लग्न को ही सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
“कार्तिक अमावस्या की रात्रि में प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न का संयोग महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। 8 नवंबर 2026 की शाम को केवल 1 घंटे 19 मिनट का ऐसा समय है जब प्रदोष काल और वृषभ लग्न दोनों एक साथ रहेंगे। इसी समय में दीपदान और मुख्य पूजन निष्पादित किया जाना चाहिए।”
— पंडित काशीनाथ शास्त्री, प्रमुख ज्योतिषाचार्य
जमीनी हकीकत, तकनीकी पहलू और प्रशासनिक कार्रवाई
दीपावली के अवसर पर देश के सभी प्रमुख नगरों में सुरक्षा और सुगम आवागमन हेतु कड़े इंतजाम किए गए हैं। राजधानी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ और अहमदाबाद समेत सभी बड़े महानगरों में पुलिस और अग्निशमन दल को हाई अलर्ट पर रखा गया है। प्रमुख बाजारों में भीड़भाड़ को देखते हुए ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है।
अग्निशमन विभाग (Fire Department) ने भी आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष रूप से तंग गलियों और व्यावसायिक क्षेत्रों में फायर टेंडर्स की तैनाती की है। बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) ने भी त्योहार की रात निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं ताकि पूजा के समय कहीं भी ब्लैकआउट की स्थिति पैदा न हो।
पर्यावरण नियम, सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश और सुरक्षा व्यवस्था
दीपावली के अवसर पर वायु प्रदूषण और आगजनी की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन कराया जा रहा है।
- ग्रीन क्रैकर्स (Green Crackers) का प्रयोग: केवल प्रमाणित हरित पटाखों की बिक्री और उपयोग की अनुमति दी गई है।
- पटाखे फोड़ने की समयावधि: रात्रि 08:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक ही आतिशबाजी की अनुमति शासन द्वारा प्रदान की गई है।
- ध्वनि और वायु मानक: अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और साइलेंस जोन के आसपास पटाखे जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।
“जनता से अपील की जाती है कि वे दीपावली का पर्व उल्लास के साथ मनाएं लेकिन सुरक्षा मानकों और वायु गुणवत्ता का ध्यान रखें। अग्निशमन की गाड़ियां और आपातकालीन सेवाएं 24 घंटे तत्पर हैं। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत 112 या 101 पर संपर्क करें।”
— राज्य आपदा प्रबंधन एवं अग्निशमन सेवा महानिदेशालय
विशेषज्ञों की राय, सामाजिक असर और भविष्य की चुनौतियां
आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से इस वर्ष की दीपावली भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद उत्साहजनक साबित हुई है। ‘वोकल फॉर लोकल’ (Vocal for Local) अभियान के तहत इस साल स्वदेशी मिट्टी के दीयों, हस्तशिल्प और भारतीय निर्मित सजावटी सामानों की बंपर बिक्री दर्ज की गई है। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार, इस वर्ष दिवाली सीजन के दौरान भारतीय बाजारों में रिकॉर्ड लाखों करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है, जिससे स्थानीय कारीगरों और छोटे कारोबारियों को सीधा लाभ मिला है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि जहां एक तरफ आर्थिक गतिविधियां और उत्सव का माहौल सकारात्मक है, वहीं उत्सव के बाद वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को नियंत्रित रखना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। समाज को जिम्मेदार नागरिक के रूप में दीपोत्सव मनाते हुए प्रकृति और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने का संकल्प लेना होगा। थोड़ी ही देर में शुरू हो रहे शुभ मुहूर्त में शास्त्रोक्त विधि से पूजन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ):
दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त कब से कब तक है?
8 नवंबर 2026 की शाम को प्रदोष काल में शाम 05:35 बजे से रात 07:31 बजे तक लक्ष्मी पूजन का सर्वोत्तम समय है। इसमें वृषभ काल स्थिर लग्न का योग बन रहा है।
महानिशीथ काल में पूजा का समय क्या रहेगा?
तांत्रिक साधना और विशेष महालक्ष्मी पूजा के लिए महानिशीथ काल रात 11:39 बजे से मध्यरात्रि 12:31 बजे तक रहेगा।
लक्ष्मी पूजा में किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए?
पूजा स्थान पर स्वच्छता रखें, उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापित करें, और स्थिर लग्न में ही मुख्य दीप प्रज्वलित करें।
Accredited news correspondent and investigative contributor at AvaNews.in.
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है
इस खबर पर सबसे पहले अपनी राय साझा करें और चर्चा शुरू करें!