इजराइल में बड़ा सियासी उलटफेर: बेंजामिन नेतन्याहू को झटका, राष्ट्रपति ने गैडी आइज़नकोट को दिया सरकार बनाने का न्योता; अरब पार्टियां बनीं ‘किंगमेकर’
📌 प्रमुख बातें व मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- इजराइली राष्ट्रपति ने पूर्व सैन्य प्रमुख और विपक्षी नेता गैडी आइज़नकोट को नई सरकार के गठन का आधिकारिक जनादेश सौंपा।
- बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी गठबंधन का आवश्यक बहुमत साबित करने में असमर्थ रही, जिससे उनका गठबंधन बिखर गया।
- इजराइल की संसद (नेसेट) में अरब पार्टियों के पास चाबी है; उनके समर्थन के बिना आइज़नकोट के लिए 61 का आंकड़ा पार करना कठिन है।
- आइज़नकोट को गठबंधन साबित करने के लिए 28 दिनों का समय मिला है, जिसके दौरान मध्य-पूर्व शांति और आंतरिक सुरक्षा मुख्य मुद्दे रहेंगे।
यरूशलम / नई दिल्ली। इजराइल के राजनीतिक इतिहास में आज यानी 8 नवंबर 2026 को एक अभूतपूर्व और अत्यंत ऐतिहासिक घटनाक्रम दर्ज किया गया है। लंबे समय से देश की सत्ता पर हावी रहे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गठबंधन की विफलता के बाद, इजराइली राष्ट्रपति ने आधिकारिक तौर पर पूर्व सेना प्रमुख और प्रमुख विपक्षी नेता गैडी आइज़नकोट (Gadi Eisenkot) को नई सरकार बनाने का न्योता भेजा है। इस घटनाक्रम ने न केवल इजराइल के घरेलू राजनीतिक समीकरणों को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि मध्य-पूर्व की संपूर्ण सामरिक स्थिति पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ अरब राजनीतिक दलों की भूमिका को लेकर आया है। 120 सदस्यों वाली इजराइली संसद ‘नेसेट’ (Knesset) में त्रिशंकु स्थिति बनने के कारण अरब पार्टियां अचानक ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ गई हैं। इजराइल के संसदीय इतिहास में यह विरला ही मौका है जब देश का प्रधानमंत्री कौन बनेगा, इसका अंतिम फैसला मुख्यधारा की यहूदी पार्टियों के बजाय अरब नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले राजनेताओं के हाथों में टिक गया है।
घटना का विस्तृत विवरण: क्या हुआ और कैसे बदले राजनीतिक हालात?
हालिया संसदीय गतिरोध और गठबंधन सहयोगियों के बीच जारी तीखे मतभेदों के चलते बेंजामिन नेतन्याहू 61 सांसदों के जादुई आंकड़े को हासिल करने में नाकाम रहे। सुरक्षा नीतियों, न्यायिक सुधारों और देश की आंतरिक अर्थव्यवस्था को लेकर नेतन्याहू के सहयोगियों में दरारें स्पष्ट दिखाई दे रही थीं। राष्ट्रपति भवन (बैत हानासी) में हुई गहन परामर्श बैठकों के बाद राष्ट्रपति ने कानून के अनुसार दूसरे सबसे बड़े प्रभावशाली धड़े के नेता गैडी आइज़नकोट को सरकार गठन का दायित्व सौंपने का निर्णय लिया।
“इजराइल को इस समय व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर एक स्थिर, जिम्मेदार और समावेशी नेतृत्व की आवश्यकता है। मुझे संविधान के तहत mandate प्राप्त हुआ है और मैं एक ऐसी राष्ट्रीय एकता सरकार का निर्माण करूंगा जो देश के सभी नागरिकों की सुरक्षा और अधिकार सुनिश्चित करे।”
— गैडी आइज़नकोट, इजराइल के मनोनीत प्रधानमंत्री
गैडी आइज़नकोट, जिन्होंने इजराइल रक्षा बलों (IDF) के 21वें चीफ ऑफ जनरल स्टाफ के रूप में सेवाएं दी हैं, अपनी सख्त सुरक्षा छवि और व्यावहारिक शासन शैली के लिए जाने जाते हैं। नेतन्याहू के कड़े आलोचक रहे आइज़नकोट ने हमेशा से इजराइल में लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और रणनीतिक संतुलन पर जोर दिया है।
जमीनी हकीकत, रणनीतिक पहलू और गठबंधन का गणित
इजराइली संसद (नेसेट) का गणित इस समय अत्यधिक जटिल हो चुका है। सरकार बनाने के लिए कुल 120 सीटों में से कम से कम 61 सीटों का स्पष्ट समर्थन आवश्यक है। वर्तमान स्थिति में विभिन्न राजनीतिक गुटों का विभाजन इस प्रकार है:
- नेतन्याहू समर्थित दक्षिणपंथी गुट: लगभग 52 से 54 सीटें।
- आइज़नकोट का मध्य-वामपंथी व उदारवादी गुट: लगभग 53 से 56 सीटें।
- अरब पार्टियां (जैसे यूनाइटेड अरब लिस्ट / हदाश-तआल): 8 से 10 निर्णायक सीटें।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि न तो नेतन्याहू और न ही आइज़नकोट अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ सीधे 61 के आंकड़े तक पहुंच सकते हैं। ऐसे में मंसूर अब्बास के नेतृत्व वाली ‘यूनाइटेड अरब लिस्ट’ और अन्य अरब सांसदों का रुख ही यह तय करेगा कि यरूशलम के नए प्रधानमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा। अरब पार्टियों ने भी सरकार में शामिल होने या बाहर से समर्थन देने के एवज में अरब बहुल इलाकों में बुनियादी ढांचे का विकास, पुलिसिंग में सुधार और बजट आवंटन बढ़ाने जैसी कड़ी शर्तें रखी हैं।
संवैधानिक प्रावधान, बहुमत का आंकड़ा और अरब पार्टियों की भूमिका
इजराइल के बुनियादी कानून (Basic Law: The Government) के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत नेता को अपनी कैबिनेट का गठन करने और संसद में विश्वास मत हासिल करने के लिए 28 दिनों की समय-सीमा दी जाती है। यदि विशेष परिस्थितियां बनती हैं, तो राष्ट्रपति इस अवधि को 14 अतिरिक्त दिनों के लिए बढ़ा सकते हैं।
यदि गैडी आइज़नकोट 28 दिनों के भीतर अरब पार्टियों या कुछ असंतुष्ट दक्षिणपंथी सांसदों के सहयोग से समर्थन पत्र प्रस्तुत करने में सफल रहते हैं, तो बेंजामिन नेतन्याहू के लंबे युग पर औपचारिक विराम लग जाएगा। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि एक ऐसे गठबंधन को चलाना, जिसमें एक तरफ पूर्व इजराइली जनरल हों और दूसरी तरफ अरब राष्ट्रवादी दल, बेहद संवेदनशील और नाजुक काम होगा।
विशेषज्ञों की राय, वैश्विक असर और भविष्य की चुनौतियां
अंतरराष्ट्रीय मामलों और मध्य-पूर्व राजनीति के विशेषज्ञों का मानना है कि इजराइल में सत्ता परिवर्तन की यह बयार वैश्विक कूटनीति पर गहरा असर डालेगी। वाशिंगटन से लेकर मध्य-पूर्व के अन्य देशों तक की नजरें यरूशलम के इस सियासी नाटक पर टिकी हैं।
AVA News के वरिष्ठ विश्लेषकों के अनुसार, गैडी आइज़नकोट के नेतृत्व वाली सरकार के गठन से इजराइल की विदेश नीति में अधिक संयम और रणनीतिक समन्वय देखने को मिल सकता है। अमेरिका और यूरोपीय संघ आइज़नकोट के साथ काम करने को लेकर सहज महसूस कर सकते हैं, क्योंकि वे नेतन्याहू के अति-दक्षिणपंथी सहयोगियों की नीतियों से चिंतित थे। दूसरी ओर, यदि अरब पार्टियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सरकार को स्थिरता देती हैं, तो यह इजराइल के भीतर अरब-इजराइली समुदाय के मुख्यधारा में समावेश के लिए एक नया अध्याय सिद्ध हो सकता है।
निष्कर्षतः, आने वाले 28 दिन इजराइल के भावी इतिहास, सुरक्षा संरचना और लोकतांत्रिक स्वरूप के लिए अत्यंत निर्णायक साबित होने जा रहे हैं। ‘सदैव सच की ओर’ के अपने संकल्प के साथ AVA News यरूशलम से आ रही हर क्षण की हलचल पर पैनी नजर बनाए हुए है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ):
गैडी आइज़नकोट कौन हैं और उन्हें यह मौका कैसे मिला?
गैडी आइज़नकोट (Gadi Eisenkot) इजराइल रक्षा बलों (IDF) के पूर्व मुख्य स्टाफ (Chief of General Staff) और एक प्रमुख विपक्षी राजनेता हैं। बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा संसद में बहुमत साबित न कर पाने के बाद राष्ट्रपति ने आइज़नकोट को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है।
इजराइली संसद में अरब पार्टियां 'किंगमेकर' कैसे बनीं?
इजराइल की 120 सदस्यीय संसद (नेसेट) में बहुमत के लिए 61 सीटों की आवश्यकता है। वर्तमान राजनीतिक विभाजन में न तो दक्षिणपंथी गुट और न ही वाम-मध्यमार्गी गुट अपने दम पर 61 का आंकड़ा छू पा रहे हैं। ऐसे में 8-10 सीटों वाली अरब पार्टियां (जैसे यूनाइटेड अरब लिस्ट) जिस गुट का समर्थन करेंगी, उसी की सरकार बनेगी।
यदि गैडी आइज़नकोट 28 दिनों में सरकार नहीं बना पाते हैं तो क्या होगा?
यदि आइज़नकोट निर्धारित 28 दिनों की अवधि (और संभावित 14 दिनों के विस्तार) में बहुमत का समर्थन पत्र नहीं दे पाते हैं, तो इजराइली राष्ट्रपति संसद के किसी अन्य सदस्य को अवसर दे सकते हैं या देश को पुनः आम चुनावों की ओर जाना पड़ेगा।
Accredited news correspondent and investigative contributor at AvaNews.in.
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