कोलकाता के ऐतिहासिक कालीघाट मंदिर की तिजोरी की चाबी गायब, सबर्ण रॉयचौधरी परिवार ने जताई गहरी चिंता; हाईकोर्ट के जज से लगाई न्याय की गुहार
कोलकाता के विश्व प्रसिद्ध और तंत्र साधना के प्रमुख केंद्र कालीघाट शक्तिपीठ मंदिर परिसर में एक बड़े प्रशासनिक संकट और सुरक्षा चूक की खबर ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह और सेवायत कक्ष के पास स्थित अति-सुरक्षित तिजोरी (स्ट्रॉन्ग रूम) की चाबियां अचानक गायब होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस तिजोरी में सदियों पुराना सोना, चांदी, मूल्यवान रत्न और कई ऐतिहासिक धरोहरें सुरक्षित रखी गई हैं। इस गंभीर लापरवाही के सामने आने के बाद कोलकाता के ऐतिहासिक सबर्ण रॉयचौधरी (Sabarna Roy Choudhury) परिवार ने गहरा आक्रोश और चिंता जाहिर की है।
सबर्ण रॉयचौधरी परिवार, जिसे कोलकाता शहर और कालीघाट मंदिर के शुरुआती संरक्षकों व संस्थापकों में गिना जाता है, ने मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। परिवार के वरिष्ठ सदस्यों ने कलकत्ता उच्च न्यायालय (High Court) के न्यायमूर्ति और मंदिर निगरानी समिति के समक्ष एक तत्काल याचिका और पत्र प्रस्तुत कर मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। मंदिर में स्थापित इस स्ट्रॉन्ग रूम में मां काली के मुकुट, स्वर्ण आभूषण, प्राचीन सिक्के और सदियों से राजा-महाराजाओं व भक्तों द्वारा चढ़ाए गए अत्यंत मूल्यवान सामान रखे हुए हैं, जिनकी सुरक्षा अब सवालों के घेरे में आ गई है।
घटना का विस्तृत विवरण: क्या हुआ और कैसे बिगड़े हालात?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तिजोरी खोलने और आभूषणों की नियमित सूची बनाने या रखरखाव प्रक्रिया के दौरान जब संबंधित अधिकारियों और सेवायतों ने चाबियों की मांग की, तो चाबियां अपने निर्धारित स्थान से नदारद मिलीं। शुरुआती तौर पर इसे आंतरिक अव्यवस्था या चाबी के कहीं मिसप्लेस होने की बात कहकर दबाने की कोशिश की गई, लेकिन जब कई दिनों तक गहन खोजबीन के बावजूद चाबियों का कोई सुराग नहीं मिला, तो प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया।
कालीघाट मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेदारी एक विशेष समिति और सेवायतों (Sebaits) के हाथों में है, जो अलग-अलग पारियों में मंदिर की पूजा-अर्चना और सुरक्षा की देखरेख करते हैं। चाबी गायब होने की इस घटना ने न केवल मंदिर समिति के आपसी तालमेल और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि यह भी आशंका जन्म ले रही है कि क्या यह कोई साधारण लापरवाही है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी हुई है। मंदिर के स्ट्रॉन्ग रूम में रखी गई संपत्तियों का कुल मूल्य अरबों रुपये में आंका जाता है, जिनमें से कई वस्तुएं ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अमूल्य हैं।
सबर्ण रॉयचौधरी परिवार का इतिहास और वर्तमान चिंताएं
कालीघाट मंदिर का इतिहास सबर्ण रॉयचौधरी परिवार के साथ अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। 16वीं और 17वीं शताब्दी में जमींदार सबर्ण रॉयचौधरी परिवार ने ही कालीघाट में मां काली के मंदिर का निर्माण कराया था और मंदिर के दैनिक संचालन के लिए भूमि और धन दान में दिया था। यद्यपि समय के साथ मंदिर का प्रबंधन अन्य सेवायतों और बाद में अदालत द्वारा गठित समितियों के पास चला गया, लेकिन इस परिवार का सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव आज भी अटूट है।
सबर्ण रॉयचौधरी परिवार के प्रवक्ता और वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि मंदिर की तिजोरी की चाबी का गुम होना केवल एक चाबी का खोना नहीं है, बल्कि यह बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और मां काली के प्रति करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर सीधा कुठाराघात है। उन्होंने अंदेशा जताया है कि चाबी गायब होने की आड़ में तिजोरी के अंदर मौजूद बेशकीमती सामानों के साथ कोई छेड़छाड़ या हेराफेरी की जा सकती है।
अदालत का दरवाजा: जज के सामने रखी गई प्रमुख मांगें
मामले की गंभीरता को देखते हुए सबर्ण रॉयचौधरी परिवार ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस माननीय न्यायाधीश से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है, जो कालीघाट मंदिर के पुनरुद्धार और प्रशासनिक निगरानी मामले की सुनवाई कर रहे हैं। परिवार ने अदालत के समक्ष निम्नलिखित मुख्य मांगें रखी हैं:
“कालीघाट मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि हमारी अनमोल राष्ट्रीय धरोहर है। तिजोरी की चाबी गायब होना एक बेहद संदिग्ध घटना है। हम अदालत से गुजारिश करते हैं कि वह तुरंत एक स्वतंत्र न्यायिक समिति का गठन करे, जो डुप्लीकेट चाबी या ताला तोड़कर तिजोरी को खोले और विशेषज्ञ फॉरेंसिक टीमों की मौजूदगी में सभी आभूषणों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करे।”
— सबर्ण रॉयचौधरी परिवार के प्रतिनिधि का आधिकारिक बयान
परिवार ने अदालत से यह भी मांग की है कि तिजोरी खोलने की पूरी प्रक्रिया की उच्च गुणवत्ता वाली वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए और आभूषणों की वर्तमान सूची की तुलना दशकों पुरानी मूल इन्वेंट्री (Inventory List) से की जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कोई सामान चोरी हुआ है या नहीं। इसके अलावा, जिम्मेदार अधिकारियों और चाबी के संरक्षकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
मुख्य बिंदु और प्रमुख आंकड़े
- मंदिर का नाम: कालीघाट शक्तिपीठ मंदिर, कोलकाता (पश्चिम बंगाल)।
- विवाद का विषय: मंदिर के मुख्य स्ट्रॉन्ग रूम (तिजोरी) की चाबियों का रहस्यमयी तरीके से गायब होना।
- सुरक्षित संपत्ति: मां काली का स्वर्ण मुकुट, प्राचीन आभूषण, सोने-चांदी के बर्तन और सदियों पुराने ऐतिहासिक सिक्के।
- शिकायतकर्ता: ऐतिहासिक सबर्ण रॉयचौधरी परिवार (कोलकाता के संस्थापक जमींदार परिवार)।
- अदालत से मांग: हाईकोर्ट जज की निगरानी में फॉरेंसिक ऑडिट, वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल इन्वेंट्री मैपिंग।
- सुरक्षा ढांचा: वर्तमान में मंदिर की देखरेख हाईकोर्ट द्वारा गठित समिति और स्थानीय पुलिस प्रशासन की निगरानी में होती है।
सरकारी रुख, मंदिर प्रबंधन और जमीनी हकीकत
चाबी गायब होने की खबर सार्वजनिक होते ही मंदिर परिसर के आसपास पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन और कोलकाता पुलिस की टीम भी मामले की आंतरिक जांच में जुट गई है। हालांकि, मंदिर समिति के कुछ सदस्यों का दावा है कि चाबियां समिति के ही किसी वरिष्ठ सेवायत के पास हो सकती हैं और वे जल्द ही इसे जमा करा देंगे, लेकिन इस ढुलमुल रवैये से भक्तों और कानूनी विशेषज्ञों का असंतोष बढ़ता ही जा रहा है।
दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल सरकार के पर्यटन व संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने भी इस घटनाक्रम पर नजर बना रखी है। कालीघाट मंदिर में पिछले कुछ वर्षों से ‘कालीघाट स्काईवॉक’ और मंदिर सौंदर्यीकरण परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। ऐसे समय में तिजोरी की चाबी का गायब होना राज्य सरकार और मंदिर प्रशासन दोनों के लिए एक बड़ी फजीहत का सबब बन गया है।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की चुनौतियां
कानूनी और सांस्कृतिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में संपत्तियों के रखरखाव और सुरक्षा के लिए एक एकीकृत और पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था का होना अत्यंत आवश्यक है। तिरुपति बालाजी, जगन्नाथ पुरी और पद्मनाभस्वामी मंदिर की तर्ज पर कालीघाट मंदिर में भी सभी बहुमूल्य वस्तुओं का क्यूआर कोड आधारित डिजिटलीकरण और जीपीएस-सक्षम तिजोरी सुरक्षा प्रणाली लागू की जानी चाहिए।
भविष्य की रणनीति पर बात करते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक कलकत्ता हाईकोर्ट इस मामले में कोई सख्त निर्देश जारी नहीं करता, तब तक स्ट्रॉन्ग रूम को पूरी तरह से सील रखा जाना चाहिए। सबर्ण रॉयचौधरी परिवार की याचिका पर हाईकोर्ट में जल्द ही सुनवाई होने की संभावना है, जिस पर पूरे बंगाल और देश भर के श्रद्धालुओं की निगाहें टिकी हुई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस ऐतिहासिक मंदिर की सुरक्षा और धरोहर की रक्षा के लिए क्या कड़े कदम उठाती है।
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