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उपराष्ट्रपति का पूर्वोत्तर दौरा: गुवाहाटी में युवाओं से नशे के खिलाफ जंग और राष्ट्र निर्माण में योगदान की बड़ी अपील

उपराष्ट्रपति का पूर्वोत्तर दौरा: गुवाहाटी में युवाओं से नशे के खिलाफ जंग और राष्ट्र निर्माण में योगदान की बड़ी अपील

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का चार दिवसीय पूर्वोत्तर दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और इस क्षेत्र के रणनीतिक व सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। अपने इस विस्तृत दौरे के पहले चरण में उपराष्ट्रपति असम की राजधानी गुवाहाटी पहुंचे, जहां उनका पारंपरिक असमिया शैली में भव्य स्वागत किया गया। गुवाहाटी में आयोजित एक विशेष नागरिक अभिनंदन और युवा संवाद कार्यक्रम में उन्होंने शिरकत की। इस कार्यक्रम में असम के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षाविद् उपस्थित थे।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने पूर्वोत्तर के युवाओं को देश की सबसे बड़ी जनसांख्यिकीय ताकत (Demographic Dividend) बताते हुए उनसे नशे की लत से पूरी तरह दूर रहने और राष्ट्र निर्माण में अपनी असीम ऊर्जा लगाने की पुरजोर अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने का सपना तभी साकार हो सकता है, जब देश की युवा पीढ़ी शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से सशक्त होगी।

दौरे का विस्तृत विवरण: गुवाहाटी में उपराष्ट्रपति का ऐतिहासिक संबोधन

उपराष्ट्रपति का यह चार दिवसीय दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह पूर्वोत्तर राज्यों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने का एक बड़ा राष्ट्रीय प्रयास है। गुवाहाटी के प्रतिष्ठित संस्थान में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में हजारों की संख्या में छात्रों और युवा शोधकर्ताओं ने भाग लिया। उपराष्ट्रपति ने अपने भाषण की शुरुआत असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव व लाचित बोरफुकन की वीरता को नमन करते हुए की।

उन्होंने युवाओं से सीधा संवाद स्थापित करते हुए कहा कि आज का युवा केवल कल का भविष्य नहीं है, बल्कि वह आज का सबसे बड़ा नीति-निर्माता और परिवर्तनकारी एजेंट है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों से आग्रह किया कि वे छात्रों को केवल किताबी ज्ञान देने तक सीमित न रहें, बल्कि उनमें नैतिक मूल्यों, राष्ट्रीय चरित्र और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना का भी संचार करें। इस अवसर पर राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन ने भी शिक्षा के लोकतंत्रीकरण और जिम्मेदार नागरिकता पर अपने विचार साझा किए।

युवाओं को संदेश: नशे की लत के खिलाफ महाअभियान

पूर्वोत्तर क्षेत्र भौगोलिक रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और ‘गोल्डन ट्राएंगल’ (म्यांमार, लाओस और थाईलैंड) के करीब होने के कारण लंबे समय से नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध ड्रग्स के जाल से प्रभावित रहा है। उपराष्ट्रपति ने इस गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि नशा न केवल एक व्यक्ति के जीवन को नष्ट करता है, बल्कि यह पूरे परिवार, समाज और अंततः राष्ट्र की प्रगति को पंगु बना देता है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे ड्रग्स के खिलाफ एक व्यापक सामाजिक आंदोलन की शुरुआत करें। उन्होंने कहा कि युवाओं को ‘नो टू ड्रग्स’ (No to Drugs) के संकल्प को अपने जीवन का मूलमंत्र बनाना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने स्थानीय नागरिक समाज, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और शैक्षणिक संस्थानों से भी अपील की कि वे इस खतरे के खिलाफ सरकार के प्रयासों में कंधे से कंधा मिलाकर काम करें।

सरकारी रुख, आधिकारिक बयान और प्रशासन की कार्रवाई

कार्यक्रम के दौरान असम सरकार और केंद्र सरकार द्वारा पूर्वोत्तर में नशीली दवाओं के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए की जा रही सख्त कार्रवाइयों की भी समीक्षा की गई। उपराष्ट्रपति ने राज्य सरकार द्वारा ड्रग्स माफियाओं के खिलाफ चलाए जा रहे ‘जीरो टॉलरेंस’ अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मुस्तैदी के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता इस लड़ाई का सबसे अचूक हथियार है।

“युवाओं को ड्रग्स के जाल से बचाना हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता और आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है। शिक्षा, खेलकूद और कौशल विकास के माध्यम से हम युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक और रचनात्मक दिशा दे सकते हैं। पूर्वोत्तर का विकास ही भारत के समग्र विकास का प्रवेश द्वार है।”
— उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़

आर्थिक, सामाजिक और आम जनजीवन पर गहरा असर

पूर्वोत्तर में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के अभूतपूर्व विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और डिजिटल क्रांति के इस दौर में सामाजिक सुधार भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। यदि युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में रहेगी, तो आर्थिक विकास के लाभ उन तक नहीं पहुंच पाएंगे। उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ उठाकर पूर्वोत्तर के युवा वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

नशे की समस्या का सीधा असर परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। इससे अपराध दर में वृद्धि होती है और स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। उपराष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया कि जब युवा खेलों, कला, विज्ञान और उद्यमिता की ओर अग्रसर होंगे, तो समाज में एक सकारात्मक बदलाव आएगा और पूर्वोत्तर भारत के विकास का मुख्य इंजन बनकर उभरेगा।

मुख्य बिंदु और प्रमुख आंकड़े

  • चार दिवसीय दौरा: उपराष्ट्रपति का यह दौरा असम और मेघालय सहित पूर्वोत्तर के प्रमुख राज्यों में विभिन्न विकास परियोजनाओं और शैक्षणिक कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए आयोजित किया गया है।
  • युवाओं की भागीदारी: गुवाहाटी में आयोजित इस विशेष संवाद कार्यक्रम में 5,000 से अधिक छात्रों, शोधकर्ताओं और युवा उद्यमियों ने हिस्सा लिया।
  • ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई: गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में पूर्वोत्तर राज्यों में रिकॉर्ड मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं और सैकड़ों तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा गया है।
  • बजटीय आवंटन में वृद्धि: केंद्र सरकार द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास (DoNER) के लिए बजटीय आवंटन में पिछले एक दशक में 400% से अधिक की ऐतिहासिक वृद्धि की गई है।

विशेषज्ञों की राय और भविष्य की चुनौतियां

समाजशास्त्रियों और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर में नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल पुलिसिया और कानूनी कार्रवाई काफी नहीं है। इसके लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें सीमा सुरक्षा को कड़ा करना, आधुनिक पुनर्वास केंद्रों (Rehabilitation Centers) की स्थापना करना और युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार व स्वरोजगार के अवसरों का सृजन करना शामिल है।

उपराष्ट्रपति के इस दौरे और उनके प्रेरक संबोधन ने पूर्वोत्तर के युवाओं में एक नई चेतना और आत्मविश्वास का संचार किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तित्व सीधे जमीन पर जाकर युवाओं से संवाद करते हैं, तो नीतियों के क्रियान्वयन में तेजी आती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकारें, स्थानीय प्रशासन और नागरिक समाज उपराष्ट्रपति के इस आह्वान को धरातल पर उतारने के लिए आने वाले समय में क्या ठोस कदम उठाते हैं।

Accredited news correspondent and investigative contributor at AvaNews.in.

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